आखिर क्यों उत्तराखंड की इस खबसूरत जगह को भारत का स्विट्ज़रलैंड जाता है।
दोस्तों आज हम लोग एक ऐसी जगह के बारे में बात करने कजा रहे हैं जहाँ की प्राकृतिक खूबसूरती लोगों के सपनो में आया करती है। एक ऐसी जगह जो किसी भी इंसान के मन को मोह लेती है। एक ऐसी अनछुई अनसुनी धरती जहाँ पर प्रकृति की सुंदरता अपने रंग बिखेर रही है।
जी हाँ "चोपता" (CHOPTA)
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| Chopta |
दोस्तों आज हम लोग बात करेंगे भारत के मिनी स्विट्ज़रलैंड चोपता की , चोपता उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में चन्द्रशिला पर्वत की गोद में बसा हुआ एक ऐसा स्थान है कि जिसकी सुंदरता किसी भी मेहमान का दिल जीत लेती है।
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मात्र 220 KM की दूरी पर है। और रुद्रप्रयाग से सिर्फ 40 KM की दूरी पर यह स्थान पर्यटकों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं।
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| Picture Credit: SB Shubham |

दोस्तों अगर आपने कभी जन्नत या स्वर्ग की कल्पना की हो और उस जगह को अगर आप हकीकत में देखना चाहते हों तो यकीन मानिये एक बार जरूर इस जगह पर जाए ये जगह अपने आप में एक स्वर्ग है। वैसे तो खूबसूरती देवभूमि उत्तराखंड के कण-कण में बसी हुयी है लेकिन यहाँ पर प्रकृति का अलग ही रूप दिखेगा। रुद्रप्रयाग से जब हम मन्दाकिनी नदी के किनारे से सड़क का सफर का सफर तय करते हुए उखीमठ पहुंचते हैं तो वहां से प्रकृति अपनी छटा बिखेरने लगती हैं घने जंगलों के बीच एक घूमाउदार सड़क चारों तरफ हरियाली और मीठी की ख़ूशबू और हिमालय की ऊँची -ऊँची बर्फ ढकी हुई चोटियां अकल्पनीय सा लगता है मगर यह सच है। जैसे जैसे आप इस मार्ग पर आगे बढ़ते जायेंगे आप अपने सफर की थकान को यकीनन भूल जायेंगे थोड़ा आगे पहुंच कर आती है आपकी मंजिल यानी चोपता यहाँ पर आपकी गाडी को छोड़ पैदल चलना होगा। अब आप देवों के देव महादेव तुंगनाथ मंदिर मार्ग पर आगे बढ़ेंगे (दोस्तों तुंगनाथ के बारे में आपको अगली पोस्ट में जानकारी दी जाएगी )जैसे जैसे आप पैदल आगे बढ़ेंगे यहाँ चल रही ठंडी और ताज़ी हवाएं आपके अंदर एक नया जोश भर देंगी। मिटटी की खुसबू और बाँझ बुरांस के पेड़ों की महक मन में एक नया जोश भरने लगती है और मन में आनंद की अनुभूति होने लगती है। इस ३ KM के ट्रैक पर आपको हर एक कदम पर प्रकृति का एक एहसास होगा। हरे भरे घास के मैदान (बुग्याल ) आपको अपनी ओर आकर्षित करेंगे इन बड़े बड़े बुग्यालों में बैठकर एक सांस भरिये यकीन मानिये ये आपकी जिंदगी में कुछ पल के लिए तनाव को मुक्त कर देगी। इन घास के बुग्यालों के सामने हिमालय के बर्फीले शिखर और हसींन वादियां किसी जन्नत से कम नहीं।
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| Chopta Mountains |
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| Chopta |
यह ३ कम का ट्रैक तुंगनाथ मंदिर से होते हुए चंद्रशिला मंदिर की की चोटी जाकर समाप्त होता है।पर्यटकों में यह ट्रैक बहुत ही रोमांचक और लोकप्रिय है। तुंगनाथ मंदिर के दर्शन के बाद जब हम चंद्रशिला की चोटी पर पहुंचते हैं तो शब्दों में उस एहसास को बयाँ करना बहुत ही मुश्किल है।
वह पहुंचते ही आपको चारो ओर से बर्फ से ढकी हुयी चोटियां दिखेंगी और आप भी उतनी ही ऊंचाई पर होंगे यकीन मानिये ये एहसास बहुत ही अकल्पनीय और अविश्वसनीय है। अगर मौसम साथ दे तो बहुत बार इस चोटी से नीचे छाया हुआ कोहरा आपको बादलों से ऊपर होने का एहसास दिलाता है। फोटोग्राफी के लिए यह जगह सच में बहुत ही सुन्दर है प्रकृति के इस नज़ारे को देख यहाँ प्रकृति की गोद में समां जाने का मन हर किसी का होता है।
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Chandrasila
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| View from Chandrasila Peak |
सचमुच में यहाँ का अकल्पनीय प्राकृतिक सौन्दर्य शुद्ध, साफ़ व हरित वातावरण और साथ में आस्था और भक्ति की धुन में मन यहीं खो जाता है।
एक बार आप भी यहाँ जरूर आइये।
दोस्तों आशा है आपको ये पोस्ट अच्छी लगी होगी अपना फीडबैक कमेंट कर जरूर बताइये। इससे जुड़े हुए किसी भी सवाल या ट्रेवल एंड स्टे पैकेज की जानकारी आप वेबसाइट से ले सकते हैं या हमारी ऑफिसियल ई -मेल आईडी पर हमें मेल कर सकते हैं।
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